Monday, September 10, 2018

कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के बारे में एक ऐसी धारणा है

सवालः कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के बारे में एक ऐसी धारणा है कि वे जनता से सीधा कनेक्ट नहीं कर पाते, जनता की ज़ुबान में नहीं बोलते हैं. जिस तरह नरेंद्र मोदी, अरविंद केजरीवाल या मायावती बात करते हैं उसके मुक़ाबले आपका बात करने का तरीका सेमिनार सरीखा होता है. ऐसी आपकी आलोचना होती है. क्या इस पर कभी चर्चा होती है?
यह एक तरह का दुष्प्रचार है. कुछ दिन पहले दिल्ली में लाखों किसान मज़दूर आए हैं वो किससे प्रोत्साहित होकर आए हैं...
सवालः लेकिन यह समर्थन फिर वोट में तब्दील क्यों नहीं होता?
(हंसते हुए) यह सवाल तो पार्टी के अंदर भी सबसे बड़ा चर्चा का मुद्दा है. देश के अंदर वर्ग संघर्ष दो टांगों पर टिका हुआ है. एक है आपका आर्थिक शोषण दूसरा है सामाजिक शोषण. अब सिर्फ एक टांग को लेकर आर्थिक शोषण को लेकर आप दौड़ने की कोशिश करेंगे तो चल भी नहीं पाएंगे.
जब तक सामाजिक शोषण का जो संघर्ष है, उसे आर्थिक शोषण के संघर्षों के साथ नहीं जोड़ेंगे तो यही विरोधाभाष फ़िलहाल नज़र आता है.
पहले नारा होता था कि जिस भी फ़ैक्ट्री से धुंआ निकलता हुए दिखे तो उसके गेट पर लाल झंडा लहराना चाहिए. अब हमारा कहना है कि यह तो होना ही चाहिए, इसके साथ हर गांव में जिस कुएं से दलितों और पिछड़ों को पानी नहीं पीने देते, उस कुएं के ऊपर भी लाल झंडा नहीं लहराएगा, यह भरोसा नहीं आएगा.
इसी विरोधाभाष को हम भी समझने की कोशिश कर रहे हैं, लोग लाखों की संख्या में संघर्ष करने आते हैं, लाठी खाते हैं, जेल जाते हैं लेकिन जब वोट का समय आता है, तब अपनी सामाजिक समझ के आधार पर बंट जाते हैं.
सवालः पिछले चुनाव में बीजेपी को दलितों के वोट बैंक का 24 प्रतिशत वोट मिलाऔर दलित समाज कम्युनिस्ट पार्टियों को थोड़ा शक़ की निगाह से देखता है. कम्युनिस्ट पार्टियों में कितने दलित और दूसरी जातियों के लोग नेतृत्व करने वाले क़द तक पहुंच पाए? sex
ये आरोप ग़लत हैं. हालांकि अगर ऊपरी स्तर पर देखें तो दलितों का प्रतिनिधित्व जितना होना चाहिए उतना नहीं है. ये मैं भी मानता हूं, और इसको दुरुस्त करने की ज़रूरत है. वो हमारी प्राथमिकता भी है.
सवालः भले ही आपको पसंद ना आए, लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी दलित पक्ष की पार्टी ये आपने अब कहना शुरू किया है. जब कन्हैया कुमार ने जेएनयू में 'लाल सलाम, जय भीम' कहना शुरू किया तब ये बातें आनी शुरू हुई. लेकिन सवाल यही है कि कम्युनिस्ट पार्टियों में दलितों का नेतृत्व कहां है?
कन्हैया कुमार से पहले भी यह नारा आ रहा था कि 'लाल झंडा-नीला झंडा, जय भीम लाल सलाम'...
सवालः यह तो कांशीराम के उद्भव के बाद की चीज़ है उससे पहले यह नहीं था.
बिलकुल, राजनीति के अंदर यह उसी समय उभर कर आई जब बहुजन समाज पार्टी उभर कर आई और कांशीराम जी ने उसे आगे बढ़ाया, यह बात बिलकुल ठीक है.
लेकिन दलित आंदोलन और वामपंथी आंदोलनों के बीच संबंध की बात आज की नहीं बल्कि बहुत पुरानी है. हां, वामपंथी और दलित नेताओं के बीच मतभेद भी हुए हैं. लेकिन यह कहना कि वामपंथी दलित विरोधी हैं, यह कहना ग़लत है.
सवालः दलित विरोधी नहीं, वामपंथी की छवि दलितपक्षीय नहीं हैं, जैसे बीएसपी सीधे-सीधे दलितों की बात करती है. अब बीजेपी ने भी कई दलित नेताओं के साथ संबंध बनाए और वो सरकार में भी हैं. जबकि आपकी पूरी रवायत से ही दलित ग़ायब हैं?
जो दलित संगठन हैं, जो दलितों की बात करते हैं, वो हमें भी अपने कार्यक्रमों में आमंत्रित करते हैं, यह बदलाव तो आ रहा है.
कांग्रेस के साथ गठबंधन राज्य के अनुसार तय होगा. देश के स्तर पर देखें तो कभी भी कोई महागठबंधन पहले से तय नहीं होता. आज तक जितनी भी गठबंधन सरकारें बनी हैं, वो चुनाव के बाद ही बने.
इस तरह जो भी गठबंधन होगा वो 2019 चुनाव के बाद बनेगा, बस अभी यह तय किया जाए कि बीजेपी के ख़िलाफ़ वोटों का बंटवारा कम से कम हो.
सवालः आज के ज़माने में भी सोशल मीडिया में आपलोगों की मौजूदगी बहुत ही कम है, जबकि दूसरी तरफ बीजेपी को देखेंया दूसरी पार्टियों और नेताओं को देखें तो वे सोशल मीडिया पर बहुत अधिक एक्टिव रहते हैं. डोनल्ड ट्रंप ट्विटर के ज़रिए विदेश नीतियां तय करते हैं. यह आपकी आलोचना है कि आपका मीडिया सेल नहीं है?
हमारा सोशल मीडिया सेल है, हर एक राज्य में अलग-अलग सोशल मीडिया सेल चल रहे हैं. हां, बीजेपी के मुकाबले उतना मज़बूत सोशल मीडिया नहीं है. लेकिन यह भी तो है कि अगर कोई अमरीका का राष्ट्रपति या भारत का प्रधानमंत्री होगा तो उसकी ट्विटर फॉलोइंग भी तो ज़्यादा होगी.
सवालः नरेंद्र मोदी हमेशा खुद ट्वीट नहीं करते, उनकी पार्टी में भी अलग-अलग स्तर पर सोशल मीडिया को संभाला जाता है और हिंदुत्व के एजेंडे को बढ़ाया जाता है. आप लोग अगर जय भीम लाल सलाम कह रहे हैं तो उसको बढ़ाने के लिए ट्विटर या फ़ेसबुक पर कहां प्लैटफ़ॉर्म है?
आप मेरे फ़ेसबुक या ट्विटर पर जाइए, पार्टी के फ़ेसबुक ट्विटर को देखिए वहां ये सब है. हां, एक नेटवर्क बनाने पर विचार कर रहे हैं...

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