Friday, October 12, 2018

#MeToo विकास बहल पर यौन हमले का आरोप, अनुराग ने मानी ग़लती

र्णिमा झा इसे समझाती हैं, ''अगर आप स्कूल के होमवर्क से लेकर किन दोस्तों के संग खेलना है, ये तय कर रही हैं तो इसके नुकसान समझिए. आपका बच्चा फ़ैसला नहीं ले पा रहा है. मगर आप ऐसा न करें तो वो धीरे-धीरे ज़िंदगी के फ़ैसले लेने लगेगा. क्योंकि आपके बच्चों को दुनिया का सामना अकेले करना होगा. वरना उसे आदत हो जाएगी कि मेरी मां या पापा हमेशा मेरे साथ हैं. हर मां-बाप अपने बच्चे का अच्छा चाहते हैं लेकिन एक सीमा पर जाकर रुकना होगा.''
  • बेपरवाही और फिक्र के बीच बैलेंस बनाइए
  • सही और गलत के बीच फर्क बताइए
  • बच्चों को आदेश देने की बजाय हँसी मज़ाक, गले लगने जैसे संबंध बनाइए
  • परफेक्ट पैरेंट की बजाय अच्छा पैरेंट्स बनने की कोशिश करिए
अल्का ने कहा, ''इसे करने से नुकसान ये होता है कि बच्चा समर्थ नहीं पो पाता है. वो तैयार नहीं हो पाता है. इसमें बेहतर ये रहेगा कि माता, पिता खुद पर कंट्रोल करते हुए बच्चों को कुछ छूट दें ताकि वो खुद फ़ैसला ले सके. वो गलती करें तो करें. हालांकि माता-पिता को ये पता नहीं चल पाता है कि वो कब हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग कर रहे हैं. अगर ये हो सके कि बच्चों से फीडबैक लिया जा सके. इतना स्पेस तो देना चाहिए कि बच्चा कुछ ग़लत करे तो वो लौटकर आ सके और कहे कि अब मैं आपसे सहमत हूं.''
हेलिकॉप्टर पैरेंटिंग के नुकसानों के बारे में पूर्णिमा झा संस्कृत की एक लाइन कहती हैं- अति सर्वत्र वर्जयेत.
इस अभियान में हर रोज़ कुछ नए नाम आ रहे हैं. एक ओर जहां महिलाएं निडर होकर अपनी बात सोशल मीडिया पर रख रही हैं वहीं मोदी सरकार में अहम मंत्रालयों पर आसीन ज़्यादातर महिलाओं की ओर से इस पर कोई दमदार प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली है.
अगर प्रतिक्रिया आई भी है तो भी उस तरीक़े से नहीं जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है.
केंद्र सरकार में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से जब #MeToo के बारे में पूछा गया तो उन्होंने किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
मोदी सरकर में मंत्री एमजे अकबर पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के बाद जब उनसे इस पर टिप्पणी मांगी गई तो वो बिना कुछ कहे, चुपचाप निकल गईं. आमतौर पर ट्विटर पर सक्रिय रहने वाली सुषमा ने इससे जुड़ा कोई ट्वीट भी नहीं किया है.मृति ईरानी ने प्रतिक्रिया तो दी लेकिन किसी का नाम नहीं लिया. इससे जुड़े सवाल पर पत्रकारों को जवाब देते हुए उन्होंने कहा "मैं इतना ही कह सकती हूं कि इस मामले में जिन पर आरोप लगे हैं इसका उत्तर वही दे सकते हैं."
स्मृति ईरानी ने कहा है, "मुझे खुशी है कि मीडिया उनके साथ काम करने वाली महिला कर्मचारियों से इस बारे में सवाल कर रही है लेकिन मुझे लगता है कि जिन पर आरोप लगे हैं उन्हें बयान जारी कर इस मामले में सफ़ाई देनी चाहिए. मैं इसका उत्तर देने के लिए सही व्यक्ति नहीं हूं क्योंकि मैं वहां मौजूद नहीं थी."
#MeToo अभियान पर उन्होंने कहा, "मैंने बार-बार कहा है किमैं हर उस महिला के साथ खड़ी हूं जो बाधाओं को तोड़कर समाज की बुराइयों के ख़िलाफ़ खड़ी हुई हैं."
जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी किसी का नाम तो नहीं लिया है लेकिन अपनी तरफ़ से इस पर प्रतिक्रिया ज़रूर दी है.
इंडियन एक्सप्रेस में उमा भारती की प्रतिक्रिया छपी है जिसमें उन्होंने कहा है "#MeToo एक अच्छा अभियान है. इससे आने वाले समय में कार्यस्थल पर बदलाव ज़रूर आएगा. पुरुष औरतों के साथ ग़लत व्यवहार करने की हिम्मत नहीं करेंगे. औरतें बिना डर के काम कर पाएंगी और अगर कोई उनके लड़की होने की वजह से उनका उत्पीड़न करने की कोशिश करेगा तो वो शांत नहीं बैठेंगी. पुरुषों को अब सतर्क रहना होगा."
जो महिलाएं अपनी बातों को लेकर सामने आ रही हैं उन्हें इस कारण शर्म करने की कोई ज़रूरत नहीं है."हीं एक टीवी चैनलवास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं आई है.
कैबिनेट में कृषि राज्यमंत्री कृष्णा राज ने ट्विटर अकाउंट पर नवरात्रि की बधाई देते हुए औरत को शक्ति का स्वरूप तो बताया है लेकिन अभी तक उनकी तरफ़ से भी इस मुहिम को लेकर कोई बयान नहीं आया है.
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने #MeToo को लेकर एक ट्वीट किया है. वो लिखती हैं कि जिस तरह इस अभियान के तहत महिलाओं के मामले मीडिया में सामने आ रहे हैं, उसे देखकर बहुत बुरा लग रहा है. sex
से बात करते हुए रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने #MeToo अभियान का समर्थन किया. हालांकि उन्होंने एमजे अकबर पर कोई टिप्पणी नहीं दी.
उन्होंने कहा, "मैं उन महिलाओं का समर्थन करती हूं जो अपने अनुभव साझा कर रही हैं. ये महिलाएं बुरे दौर से गुज़री होंगी और सामने आने के लिए काफ़ी हिम्मत चाहिए."
इसमें सबसे प्रमुख रहा है महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी का बयान. उन्होंने कहा कि राजनेताओं पर लगे आरोपों समेत, सभी इल्ज़ामों की जांच होनी चाहिए.

Monday, October 1, 2018

看印度如何用奖惩机制治理大气污染

对于面临空气污染治理和清洁能源转型双重挑战的中印两国而言,要解决这一共有问题,协作和对话不可或缺。

糟糕的
空气质量(详见图1、图2)已经成为中印两国举国上下共同关注的一大政治问题。在2017年3月5日举行的中国全国人民代表大会开幕式上,空气污染再次成为热门话题。会上,中国总理李克强重申了政府净化空气的决心,承诺将加大清洁能源投资,并对污染者实施更加严厉的制裁。

在印度,独立评估方统计数据认为电站、工业及运输业造成的污染给人类健康带来的毁灭性影响,这引发了持续的公众争议。为有效缓解污染危机,中印两国必须逐步引入支持净化空气、水和土壤的技术,以取代原先的污染技术。此类转型的推进在很大程度上取决于各国国情。因此,对两国政府而言,怎么做才是推广这些技术的最佳方法:是大棒,还是胡萝卜?怎样的激励或抑制措施才是最有效的呢?

中印两国面临类似挑战。为减少有害排放,两国都把为现有燃煤电站安装脱硫、脱硝和除尘设备作为首要工作。
中国和印度也都为电力、运输和工业部门制订了相应的排放标准,但落实这些标准仍是一大挑战。例如,人们普遍认为北京至少还需要10年才能重见蓝天,印度则还需更久。

除了排放标准这类行政管理措施,也就是“大棒”政策之外,中国还针对安装大气污染控制设备的燃煤电站执行环保电价加价政策,也就是“胡萝卜”政策。据估计,2014年和2015年,该政策每年给电站带来1000亿人民币的额外收入。

印度经济发展水平较低,预算有限,无法用如此昂贵的“胡萝卜”来鼓励燃煤电站削减污染排放。因此,政府的首要工作是让国民用得起电,提高电力普及度,让20%家里还没有通电的民众用上电。这一点与中国完全不同,中国的电力覆盖率高达100%,而燃煤电站产能过剩则是其面临的主要挑战。

印度也征收煤炭使用税,实际上就是碳排放税,并且一部分用于支持开发清洁技术。2014年以来,这一税率增长了8倍,目前每吨煤炭约400印度卢比(约42元人民币)。据估计,2011年至2016年间,约有1361.6亿卢比(约143.65亿元人民币)煤炭税转入印度国家清洁能源基金。

中印两国通过上网电价等针对可再生能源的“胡萝卜”政策,迅速推动了可再生能源装机容量的增长。然而,这些新增装机只有物尽其用才能促进清洁能源转型,但中印两国都面临着一定程度的“弃风”问题。

其中一大原因在于政府的 “毒胡萝卜 ”(有害激励)政策。以中国为例,一些政策企图遏制煤电装机,另一些政策却规定燃煤电站必须运营一定的时间。因此,2016年辽宁、吉林、黑龙江和内蒙古东部的风电量总价值约69亿人民币,其中一部分原因在于煤电优先的政策。

在印度,可再生能源开发商享受额的加速折旧补贴,但电力的生产或配送却没有保证。印度政府为补贴设置了40%的上限,风电的开发则采用逆向竞价机制,报价最低的卖方才能中标。